Vijay Granth

Chapter – 3 तीसरा अध्याय

अध्याय तीन गजानना को गोसाई,  गांजा रहा पिलाय चरण वन्दना के लिये,  भक्तन की भरमार। मधुमक्खी सम भक्तजन, शहद गजानन प्यार ॥ एक दिवस श्री गजानना,  आसन बिराजमान। पूरब लाली छा रही, पक्षी करते गान ॥ अंधकार भागा गुफा, उगता सूरज देख। शीतल पवन चली चले, राम नाम की टेक ॥ प्रभात बेल सुहावनी, इक …

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Chepter – 2 दूसरा अध्याय

अध्याय दो जित देखे उत गजानना श्री गजानना चले गये, बंकटजी बेचैन। भोजन भी भाता नहीं, बसे गजानन नैन ॥ जित देखे उत गजानना, चारों ओर लखाय। हर पल श्री का ध्यान करे, बछड़े का जस गाय ॥ सोचे मन की बात को, किसको दूँ बतलाय। अगर पिताजी से कहूँ, हिम्मत ना हो पाय ॥ …

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Chapter – 1 पहला अध्याय

अध्याय एक वन्दना गौरीपुत्र गणेशजी, मयुरेश्वर जय हो। हे उदार कीरत प्रभो, परतापी जय हो॥ सन्त और विद्वान जब, कार्य करें आरम्भ। सुमिरन करते आपका, हे गणपति हेरम्भ ॥ कृपा शक्ति से आपकी, विघ्न सभी टल जाय। ज्यों अगनी के सामने,रुई भस्म हो जाय ॥ कवि ‘सुमन्त’ वन्दन करे, चरणन शीश नवाय। सरस काव्य रचना …

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